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अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव का वर्णन करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें। प्रिय मित्र मनीष कैसे हो,आशा करता हूं कि ईश्वर के कृपा से तुम आनंद मय होंगे। पिछले महीने विद्यालय में वार्षिकोत्सव का आयोजन हुआ था। क्योंकि तुम उस अवधि में अवकाश पर थे और अपने गांव गए थे। तुम विद्यालय के वार्षिकोत्सव को देखने से वंचित रह गए थे। इस बार का विद्यालय का वार्षिकोत्सव बहुत ही रंगा रंग रहा। वार्षिक उत्सव की शुरुआत गणेश वंदना से हुई तत्पश्चात बालिकाओं का ग्रुप डांस भी हुआ। उसके बाद विद्यालय के छात्रों द्वारा नशा उन्मूलन पर एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई।जिसे सभी लोगों ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के अंत में पंजाबी ग्रुप डांस प्रस्तुत किया गया और उसके पश्चात प्रधानाचार्य द्वारा वार्षिक उत्सव के समापन की घोषणा की गई। इस वार्षिकोत्सव में विद्यालय में पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा में टापर छात्रों को भी बुला कर सम्मानित किया गया। आशा करता हूं कि तुम अपने परिवार के साथ आनंद से होगे और आगे वार्षिक उत्सव में अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करवाओगे।शेष बातें तुम्हारे आने के बाद होगी। अपना ख्य...
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मुंशी प्रेमचंद: मेरे प्रिय लेखक किसी भाषा के उन्नयन में उस भाषा के लेखकों का हाथ होता है। हिंदी भाषा के विकास में तुलसीदास,भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद जैसे धन्य लेखकों का योगदान रहा है। हिंदी को लोकप्रिय कथा साहित्य से समृद्ध करने वाले गिने-चुने लेखकों में मुंशी प्रेमचंद का नाम लिया जाता है। प्रेमचंद ने भारतीय समाज को अंधविश्वासी और रूढ़िवादी परंपराओं से लड़ने के लिए ना केवल प्रेरित किया, अपितु उसे एक दिशा भी दिया। अपने उपन्यासों, कथाओं तथा साहित्य द्वारा मानवीय करुणा, मानवीय गरिमा, मानवीय स्वतंत्रता आदि मान्यताओं एवं दृष्टिकोण की नई व्याख्या की। प्रेमचंद की कहानियों से हमें संवेदना के धरातल पर अपने देश और समाज को समझने में पूरी पूरी मदद मिलती है। मुंशी प्रेमचंद प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही नामक ग्राम में हुआ था। प्रेमचंद के बचपन का नाम धनपत राय था। इनके पिता श्री अजायब राय तथा माता आनंदी देवी थी। इनके पिताजी एक सरकारी डाकखाने में क्लर्क थे। प्रेमचंद की आयु जब 7 वर्ष की थी, तभी उनकी माता का देहांत हो गया। 15 वर्ष की आयु तक इनके ...
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